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सरसों की फसल के रोग व उनकी रोकथाम  

 

बिमारियों के कारण सरसों की पैदावार में भारी कमी आ जाती है व फसल की गुडवत्ता पर भी प्रभाव पद जाता है. सरसों की फसल में मुख्य रूप से झुलसा, सफेद रतुआ व mildew प्रभाव डालते हैं.  इन रोगों का नियंत्रण निम्नलिखित तरीकों से किया जा सकता है.

Alternaria blight (झुलसा) : इस बीमारी के कारण पत्तों, फलियों व शाखाओं पर भूरे से काले रंग के गोलाकार धब्बे पड़ने शुरू हो जाते हैं. इस बीमारी का नियंत्रण करने के लिए १५ अक्टूबर से पहले बीजाई कर देनी चाहिए व Mancozeb ०.२% का प्रयोग ५० से ६० दिन बिजाई के बाद करना चाहिए. इससे इस रोग को नियंत्रण में रखा जा सकता है. 

White Rust : यह बीमारी पत्तों के निचले हिस्सों से शुरू होकर फूलों की कोपलों की और बढ़ना शुरू हो जाती है.  यह  दूधिया सफेद रंग में तने, टहनियों व फूलों की कोपलों को जकड लेती है, जिस कारण फूलों से फली बनना मुश्किल हो जाती है. इस रोग को फसल में देखने पर ridomil mz ०.२५% बिजाई के ५० दिन बाद फसल पर छिड़क देना चाहिए. 

Mildew : यह बीमारी बीज के अंकुरित होने के करीब १०-१५ दिन के बाद फसल को लग जाती है. इस बीमारी के कारण हलके सफेद धब्बे पत्तियों के निचले हिस्से पर दिखने लगते हैं. जिस कारण पौधा अचानक टूट कर गिर जाता है. इसके नियंत्रण के लिए Ridomil MZ ०.२५% बीजाई के पचास दिन के बाद छिड़कना चाहिए व उसके बाद Mancozeb ०.२% दो बार १५ दिन के समय अन्तराल पर छिड़कना चाहिए. 

 
 
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